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वैध लीज के रहते नए समझौते पर घमासान! मलाकदोल पंचायत के फैसले को जेपी एसोसिएट्स ने हाई कोर्ट में दी चुनौती

वैध लीज के रहते नए समझौते पर घमासान! मलाकदोल पंचायत के फैसले को जेपी एसोसिएट्स ने हाई कोर्ट में दी चुनौती

ग्रामसभा की मंजूरी बिना लीज का आरोप, 5 साल की पूर्व स्वीकृत लीज के बावजूद नए करार पर उठे गंभीर सवाल

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बिलासपुर। रेत खदान लीज को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक प्रक्रिया और पंचायत की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम पंचायत मलाकदोल द्वारा किए गए नए लीज समझौतों के खिलाफ जेपी एसोसिएट्स ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पूरे मामले को न्यायिक जांच के दायरे में ला दिया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ पाण्डेय के माध्यम से पेश की गई याचिका में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि पंचायत ने 11 अप्रैल 2025 और 24 नवंबर 2025 को जिन नए लीज समझौतों को अंजाम दिया, वे नियमों और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए किए गए हैं। सबसे बड़ा आरोप यह है कि इन समझौतों के लिए ग्रामसभा की अनिवार्य स्वीकृति तक नहीं ली गई, जबकि यह प्रक्रिया कानूनी रूप से आवश्यक मानी जाती है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 30 जून 2023 को ही संबंधित खदान क्षेत्र के लिए जेपी एसोसिएट्स के पक्ष में 5 वर्षों की वैध लीज स्वीकृत की जा चुकी थी, जो वर्तमान में प्रभावी है। इसके बावजूद उसी क्षेत्र में नए लीज समझौते करना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि पूर्व स्वीकृत अधिकारों का सीधा उल्लंघन भी है।
मामले में यह सवाल भी उठाया गया है कि आखिर किन परिस्थितियों और किन अधिकारियों की सहमति से यह नया समझौता किया गया। क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी तरह की सांठगांठ और हितों का टकराव है—यह अब जांच का विषय बन गया है।
ग्राम पंचायत की इस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर भी असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है। ग्रामीण स्वशासन की मूल भावना के तहत ग्रामसभा को सर्वोच्च माना जाता है, लेकिन यदि उसकी सहमति के बिना इस तरह के फैसले लिए जाते हैं, तो यह न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पारदर्शिता पर भी गंभीर चोट करता है।
अब इस पूरे मामले पर हाई कोर्ट की नजर टिकी हुई है। अदालत का आगामी निर्णय न केवल इस विवाद का निपटारा करेगा, बल्कि भविष्य में रेत खदान लीज और पंचायतों की भूमिका को लेकर एक स्पष्ट दिशा भी तय कर सकता है।

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